विस्मय की घड़ी हो,या खुशी का मंजर निश्छल बन, बिना किसी स्वार्थ के आगे बढ़ना । विस्मय की घड़ी हो,या खुशी का मंजर निश्छल बन, बिना किसी स्वार्थ के आगे बढ़ना ।
हर लम्हा बीत जाता है तभी तो जरा सी देर में मंज़र बदल जाता है। हर लम्हा बीत जाता है तभी तो जरा सी देर में मंज़र बदल जाता है।
हमारा दिल एक दिन दृढ़ हो जाता है। हमारा दिल एक दिन दृढ़ हो जाता है।
तो पिता से जीवन जीने का नाम संग दृढ़ आधार मिलता है। तो पिता से जीवन जीने का नाम संग दृढ़ आधार मिलता है।
पूछती है खाने का मुझे फिर वो खाती है क्योंकि माँ तो माँ होती है। पूछती है खाने का मुझे फिर वो खाती है क्योंकि माँ तो माँ होती है।
पुणे की पावन भूमि बीर सपूतों का वंन्दन अभिनंन्दन।। पुणे की पावन भूमि बीर सपूतों का वंन्दन अभिनंन्दन।।